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स्वास्थ्य विभाग में खेल: टैक्सी बताकर चला दी प्राइवेट गाड़ियां
गोरखपुर
के स्वास्थ्य महकमे में गाड़ियों के अनुबंध में बड़ा खेल सामने आया है।
आरोप है कि आरबीएसके योजना में टैक्सी बताकर संचालकों ने प्राइवेट गाड़ियां
चला कर लाखों की चपत लगा दी। मामला दो साल पहले का है। शासन ने तत्कालीन
सीएमओ और एडिशनल सीएमओ के खिलाफ जांच एडी हेल्थ को सौंप दी है।
जिले के 19 ब्लॉक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत प्राथमिक स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के सेहत की जांच की जाती है। इसके लिए हर ब्लॉक में दो-दो यूनिट हैं। इन यूनिट के लिए टैक्सी परमिट वाली 38 गाड़ियों का अनुबंध वर्ष 2015-16 में किया गया।
टैक्सी बताकर लगा दी प्राइवेट गाड़ी
आरबीएसके के तहत गाड़ियों के संचलन का ठेका ज्योति इंटरप्राइजेज को मिला। आरोप है कि फर्म ने इसमें खूब खेल किया। टैक्सी बताकर विभाग में ज्यादातर प्राइवेट गाड़ियों का संचलन किया गया। इसके जरिए विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया गया।
क्लर्क की पत्नी रही फर्म की संचालक
आरबीएसके योजना में जिस फर्म को गाड़ियों का ठेका मिला उस पर भी सवाल उठ गए है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात क्लर्क की पत्नी ही फर्म के संचालक रही। ऐसे में तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से फर्म को ठेका मिल गया।
अपर मुख्य सचिव ने दिया जांच का आदेश
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग व शासन ने प्रारंभिक जांच कराई है। इस जांच में प्राइवेट गाड़ियों के संचलन और क्लर्क की भूमिका के आरोप सही मिले हैं। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव ने तत्कालीन सीएमओ और एडिशनल सीएमओ के खिलाफ इस मामले की जांच एडी हेल्थ डॉ. पुष्कर आनंद को सौंप दी है। अपर मुख्य सचिव ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच करने का भी निर्देश दिया है।
जांच शासन से मिली है। इसके लिए सीएमओ से एक हफ्ते पूर्व पत्रावली मांगी गई है। अब तक सीएमओ कार्यालय से कोई पत्रावली नहीं मिली है। इस मामले में एक बार फिर रिमाइन्डर भेजा जाएगा।
डॉ. पुष्कर आनंद, अपर निदेशक स्वास्थ्य(एडी हेल्थ)
जिले के 19 ब्लॉक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत प्राथमिक स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के सेहत की जांच की जाती है। इसके लिए हर ब्लॉक में दो-दो यूनिट हैं। इन यूनिट के लिए टैक्सी परमिट वाली 38 गाड़ियों का अनुबंध वर्ष 2015-16 में किया गया।
टैक्सी बताकर लगा दी प्राइवेट गाड़ी
आरबीएसके के तहत गाड़ियों के संचलन का ठेका ज्योति इंटरप्राइजेज को मिला। आरोप है कि फर्म ने इसमें खूब खेल किया। टैक्सी बताकर विभाग में ज्यादातर प्राइवेट गाड़ियों का संचलन किया गया। इसके जरिए विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया गया।
क्लर्क की पत्नी रही फर्म की संचालक
आरबीएसके योजना में जिस फर्म को गाड़ियों का ठेका मिला उस पर भी सवाल उठ गए है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात क्लर्क की पत्नी ही फर्म के संचालक रही। ऐसे में तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से फर्म को ठेका मिल गया।
अपर मुख्य सचिव ने दिया जांच का आदेश
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग व शासन ने प्रारंभिक जांच कराई है। इस जांच में प्राइवेट गाड़ियों के संचलन और क्लर्क की भूमिका के आरोप सही मिले हैं। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव ने तत्कालीन सीएमओ और एडिशनल सीएमओ के खिलाफ इस मामले की जांच एडी हेल्थ डॉ. पुष्कर आनंद को सौंप दी है। अपर मुख्य सचिव ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच करने का भी निर्देश दिया है।
जांच शासन से मिली है। इसके लिए सीएमओ से एक हफ्ते पूर्व पत्रावली मांगी गई है। अब तक सीएमओ कार्यालय से कोई पत्रावली नहीं मिली है। इस मामले में एक बार फिर रिमाइन्डर भेजा जाएगा।
डॉ. पुष्कर आनंद, अपर निदेशक स्वास्थ्य(एडी हेल्थ)
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